32 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के बाद जगला पहुंचे नेता प्रतिपक्ष; पीड़ित परिवारों के बीच बैठकर सुना दर्द, बोले—आदिवासियों को उनका हक और न्याय दिलाएंगे, संसद में उठाएंगे मुद्दा
संवाददाता।|01 अक्तूबर
बालाघाट/गोंदिया। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी अंचल में कुपोषण, मलेरिया और अन्य बीमारियों से बच्चों की मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। इसी गंभीर स्थिति का जायजा लेने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज (01अक्तूबर) गुरुवार को महाराष्ट्र के गोंदिया स्थित बिरसी एयरपोर्ट पहुंचे और वहां से सड़क मार्ग से बालाघाट के बिरसा क्षेत्र के ग्राम जगला पहुंचे। उन्होंने मृत बच्चों के परिजनों और बैगा आदिवासी समुदाय के लोगों के बीच बैठकर उनकी पीड़ा सुनी और उनकी समस्याओं को समझा।
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जगला में राहुल गांधी ने बच्चों को खो चुके परिवारों से बातचीत करते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं, स्वच्छ पेयजल, शिक्षा, रोजगार, जमीन और सरकारी योजनाओं से जुड़े मुद्दों की जानकारी ली। रिपोर्टों के अनुसार, प्रभावित क्षेत्र में बीमारी और कुपोषण से 32 आदिवासी बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। कुछ मामलों में मृत बच्चों के सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
पीड़ित परिवारों के बीच पहुंचे राहुल गांधी ने कहा कि “बालाघाट में आकर ऐसा लगा, जैसे हिंदुस्तान के बीच में ही हिंदुस्तान की सरकार नहीं है।” उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत कुपोषण और अन्य बीमारियों से हुई, लेकिन प्रभावित परिवारों को सरकार की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल रहा है।
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राहुल गांधी ने केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी और जिन परिवारों ने अपने बच्चे खोए हैं, उन्हें मुआवजा और आवश्यक सहायता मिलनी चाहिए। प्रभावित परिवारों को मुआवजा मिलने में कथित देरी का मुद्दा भी उन्होंने उठाया।
जमीन, वन अधिकार और मनरेगा पर भी सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने बैगा आदिवासियों के सवाल को केवल स्वास्थ्य संकट तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने जमीन से जुड़े अधिकार, वन अधिकार अधिनियम, मनरेगा और सरकारी योजनाओं के लाभ का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप था कि पात्र परिवारों को सभी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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उन्होंने कहा कि यदि सरकार दो योजनाएं चला रही है तो पात्र लोगों को दोनों योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। एक योजना का लाभ देकर दूसरी योजना से नाम काट देना उचित नहीं है।
राहुल गांधी ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों की बात करते हुए कहा कि वे उन्हें ‘वनवासी’ नहीं बल्कि ‘आदिवासी’ कहते हैं और आदिवासी समुदाय को देश का पहला मालिक बताते हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को सम्मान, अधिकार और देश में उनका उचित स्थान मिलना चाहिए।
“यह पूरी तरह मध्य प्रदेश सरकार का फेलियर है”
बालाघाट की स्थिति पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए राहुल गांधी ने इसे मध्य प्रदेश सरकार का फेलियर बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार 24 घंटे विकास की बात करती है, लेकिन जब जिम्मेदारी निभाने का समय आता है तो वह गायब हो जाती है।
उन्होंने कहा कि सरकार को आदिवासी क्षेत्रों में अस्पताल, स्कूल, स्वच्छ पानी, रोजगार और मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करनी चाहिए। उनका कहना था कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दर्द को केवल आंकड़ों में नहीं देखा जा सकता।
“मुद्दा संसद में उठाऊंगा”
बालाघाट के बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि यहां की समस्याओं और बच्चों की मौत के मामले को वे संसद में उठाएंगे। उन्होंने कहा कि आदिवासी परिवारों की आवाज संसद तक पहुंचाई जाएगी और उनके अधिकारों से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा।
राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों को भरोसा दिलाया कि वे उनके साथ खड़े हैं और कांग्रेस सत्ता में आने पर उनकी मदद करने का आश्वासन दिया। इस दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों के दर्द को सुना और कहा कि आदिवासियों को उनके अधिकार और सुविधाएं मिलना उनका हक है।
राहुल गांधी के बालाघाट दौरे के साथ बैगा आदिवासी क्षेत्र में स्वास्थ्य, कुपोषण, मुआवजा, वन अधिकार, जमीन, रोजगार और सरकारी योजनाओं की पहुंच का सवाल अब भोपाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में आ गया है।
